राज्य--राजस्थान..।
रचनाकार--पवन गौतम बृजराही बमूलिया।
सम्पर्क--9116488506
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विधा-गीत ..विषय-माँ !
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मैं भी माँ से तू भी माँ से
माँ से जग आबाद ।
लिखती नहीं लेखनी कुछ भी
माँ लिखने के बाद ।।
घूम घूम कर जग देखा है ।
सबका ले जोखा लेखा है ।
ह्रदय रीझ कर बोल उठा है,
माँ करूणा अन्तिम रेखा है।।
माँ ममता को छाँव बनाओ ,
गति रहे निर्बाध ।
लिखती नहीं लेखनी कुछ भी
माँ लिखने के बाद ।।
माँ ने हमको जग दिखलाया।
रब की सृष्टि से मिलवाया ।
जन्म से लेकर आज तलक तक,
जीवन जीना खूब सिखाया।।
माँ गौरव गाथा सृष्टि की
माँ ईश्वर संवाद।
लिखती नहीं लेखनी कुछ भी
माँ लिखने के बाद ।।
तुम गंगा तुम ही गीता हो ।
तुम ही राधा तुम सीता हो।
मेरी माँ तुम सब कुछ मेरी
जन्मदायिनी समता हो।
आँचल पकड़ कर रखना गौतम
जीवन हो नौशाद।।
लिखती नहीं लेखनी कुछ भी
माँ लिखने के बाद ।।
पवन गौतम बृजराही बमूलिया
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