नाम- माधवी गणवीर
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- तुम्हारी तरह
सम्पर्क-
राज्य- छत्तीसगढ़
शीर्षक- तुम्हारी तरह
सम्पर्क-
नज़र में हया, लब है खामोश तुम्हारी तरह,
दिल गुनगुनाता है गजल तुम्हारी तरह।
दिल गुनगुनाता है गजल तुम्हारी तरह।
दिलो में अरमान, चाहत है बेमिशाल,
आरजू ने दामन छोड़ा तुम्हारी तरह।
आरजू ने दामन छोड़ा तुम्हारी तरह।
चाहते बेपनाह बढ़ती गई इस कदर,
नजरें इनायत भी न हुई तुम्हारी तरह।
नजरें इनायत भी न हुई तुम्हारी तरह।
हर जर्रे में समाया है एक अक्स,
दिखाई दूर से दिए सब तुम्हारी तरह।
दिखाई दूर से दिए सब तुम्हारी तरह।
ख्वाबो का हसीन साया छाता रहा मुझ पर,
तसव्वुर में बनता गया अक्स तुम्हारी तरह।
तसव्वुर में बनता गया अक्स तुम्हारी तरह।
ख्वाइशें कम न हो सपनो को उड़ान भरने दो,
दामन में भर लू अरमान सारे तुम्हारी तरह।
दामन में भर लू अरमान सारे तुम्हारी तरह।
माधवी गणवीर
राजनादगांव
राजनादगांव

सुंदर भावाभिव्यक्ति
ReplyDeleteVery Nice.. Sonu, Bhopal
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