इन्दु कुमारी
राज्य - बिहार ( मधुबनी)
संपर्क - 8298739018
विधा - कविता
शीर्षक - आकाश
✍🏻आकाश✍🏻
आकाश में तेरा हिस्सा
बनना चाहती हूं
अपनी सीमाओं में बंध कर
अपनी दिव्यताओं को निखारकर
अपने सीने में बसते
सूरज की गर्मी को
चांद की चांदनी को
सितारों की झिलमिलाहट को
आकाश में तेरी ऊंचाई
छूना चाहती हूं,
अपनी साधना को साधकर,
अपनी भावना को मांजकर,
अपनी कामना को जीत कर।
तेरी शून्यता में समायी है
ब्राह्मण्ड की सम्र्पणता।
तेरी ऊंचाई से सजती है
धरती की सुन्दरता।
इन्दु कुमारी
मधुबनी बिहार
1/10/2019
बहुत सुंदर और बेहतरीन प्रस्तुति
ReplyDeleteसुंदर रचना
ReplyDeleteबहुत निक
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