कवयित्री का नाम- कु.रोजी डनसेना
राज्य का नाम- ओड़िसा,जिला- सनपुर(सुबर्णपुर)
शीर्षक-आखिर क्यों
मोबाइल-
1.आदि शक्ति की रूप की भाँति,
औरत के हैं रूप अनेक।
बेटी,बहन,पत्नी,माँ,दादी,
नाम कई मगर है वो एक।
हर रिश्ते को खूब निभाया,बोया प्रेम का बीज।
फिर फसल अपमान और अनादर का!आखिर क्यों?
2.कभी श्वेत रंग की भाँति,
सबको खुद में घोल लेती है।
कहीं इंद्रधनुष बन सी जाती,
रंग से जीवन भर देती है।
जिनसे इन रंगों की शोभा है, अस्तित्व है।
वो खुद ही बैरंग!आखिर क्यों?
3.जो देती है नवजीवन को जन्म,
जो शख्शियत को देती है सूरत।
जो अपने को मिटाकर,अपनों को उबारे।
एक नारी ही है वो दिव्य मूरत।
नारी की अंश को वंश बेल माने।
फिर उसी के जन्म पर अफसोस!आखिर क्यों।
4.कहते हैं साया है औरत,
मर्द के बाह्य काया की।
पहचान की मोहताज है नारी,
सदियों से पिता,पुत्र या पिता की।
त्याग की स्याही से जिसने शख्शियत की कहानी लिखी।
उसकी पहचान किसी ओर के नाम की!आखिर क्यों?
*कु.रोजी डनसेना*
ग्राम-खूँटपाली,पोस्ट-डुंगरीपाली
तह.-रामपुर, जिला-सोनपुर(ओड़िसा)
मोबाइल- 7377669939
राज्य का नाम- ओड़िसा,जिला- सनपुर(सुबर्णपुर)
शीर्षक-आखिर क्यों
मोबाइल-
1.आदि शक्ति की रूप की भाँति,
औरत के हैं रूप अनेक।
बेटी,बहन,पत्नी,माँ,दादी,
नाम कई मगर है वो एक।
हर रिश्ते को खूब निभाया,बोया प्रेम का बीज।
फिर फसल अपमान और अनादर का!आखिर क्यों?
2.कभी श्वेत रंग की भाँति,
सबको खुद में घोल लेती है।
कहीं इंद्रधनुष बन सी जाती,
रंग से जीवन भर देती है।
जिनसे इन रंगों की शोभा है, अस्तित्व है।
वो खुद ही बैरंग!आखिर क्यों?
3.जो देती है नवजीवन को जन्म,
जो शख्शियत को देती है सूरत।
जो अपने को मिटाकर,अपनों को उबारे।
एक नारी ही है वो दिव्य मूरत।
नारी की अंश को वंश बेल माने।
फिर उसी के जन्म पर अफसोस!आखिर क्यों।
4.कहते हैं साया है औरत,
मर्द के बाह्य काया की।
पहचान की मोहताज है नारी,
सदियों से पिता,पुत्र या पिता की।
त्याग की स्याही से जिसने शख्शियत की कहानी लिखी।
उसकी पहचान किसी ओर के नाम की!आखिर क्यों?
*कु.रोजी डनसेना*
ग्राम-खूँटपाली,पोस्ट-डुंगरीपाली
तह.-रामपुर, जिला-सोनपुर(ओड़िसा)
मोबाइल- 7377669939
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