Monday, September 30, 2019

बिहार से कवयित्री रीतु देवी"प्रज्ञा" की रचना - जंगल

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कवयित्री:-रीतु देवी"प्रज्ञा"
राज्य:-बिहार
शीर्षक:-जंगल

माँ भवानी आकर अस्मत बचाओ मेरी,
दुनिया के जंगल है हैवानियतों से भरी।
थरथर कांपे तन हमेशा,
नींद उड़ी नयनों से
हर राह लगता विरान सा
जिया न लागे तेरी इस लोक में
माँ रूद्राण गले लगा लो सुता की
फुहार बरसा दो अपने ममता की
जीवन की नैया पतवार है तेरे हाथों,
रक्षा करों माँ दानवों माथों।
माँ जगदम्बा कर जोरि करती हूँ पुकार,
दिव्य ज्योत फैला जंगल बीच करो हुंकार।
माँ भवानी आकर अस्मत बचाओ मेरी,
दुनिया के जंगल है हैवानियत से भरी।
           रीतु देवी"प्रज्ञा"
   दरभंगा, बिहार

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