Monday, September 16, 2019

छत्तीसगढ़ से कवयित्री रश्मिअग्निहोत्री की रचना- दर्द की गली में पली हूँ मै !

कवयित्री - रश्मिअग्निहोत्री
शीर्षक - दर्द की गली में पली हूँ मै !
राज्य - छत्तीसगढ़
सम्पर्क - 
बरसों दर्द की गली में पली हूँ मैं!
आज फिर दर्द खरीदने चली हूंँ मैं! 
दर्द के समंदर में डूब निकली हूँ मैं!
जो ना करना कर निकली हूँ मैं!
जानती नहीं क्यों कर गुजरती!
अनजाने में ही अपना खूँ कर!
तोहमतें लगा अपने ही जहां में!
मेहरओमा खो निकली हूँ मैं!
अश्क और यादों के समुंदर में
डूब कर निकली हूँ मैं।
रो सकती नहीं हँस लेती हूँ मैं !
चीख छुपा जिगर में निकली हूँ मैं!
मतलबी दुनिया के दस्तूर से !
देखों आज कितनी भली हूँ मैं!
यही गम रहेगा जीवन में मेरे !
अपने सारे छोड़ निकली हूँ मैं!
भोली-भाली देख दुनियादारी!
अजब-सादिक तेरे रंग ढली हूँ मैं!
रोशन करने को घर पराया!
समा बनकर लम्हा जली हूँ मैं!
हमदर्दी देख जहाँ की मुरझाई! 
सालता दर्द देख फूली-फली हूँ मैं!
बरसों दर्द की गली में पली हूँ मैं !
आज फिर दर्द खरीदने चली हूँ मैं!
#रश्मि अग्निहोत्री
केशकाल जिला कोंडागांव

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