कवयित्री का नाम-मीरा आर्ची
चौहान
राज्य-36गढ़
शीर्षक-उजाला
संपर्क-
चौहान
राज्य-36गढ़
शीर्षक-उजाला
संपर्क-
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर दो उस आंगन में
जहां झोपड़ी के छोटी
खिड़की के बाहर
झांकती है मुनिया
बस्ता लेकर जाते
नन्हें बच्चों को।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर दो उन खलिहानों में
जहां रमेली गाती है
स्वच्छ भारत के गीत।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर दो उन नौनिहालों
के चौराहे में
जहां वे भूल गए हैं
पथ
मील के पत्थर के
घिस जाने से।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर ही दो उन
भुल भुलैया राहों में
जहां विसंगतियों का
अजगर निगल रहा है
संस्कृति के पायदानों को।
धूप का छोटा-सा
टुकड़ा ही काफी है
जग से स्याह
अमावस मिटाने को
राहों में उजाला फैलाने को।
मीरा आर्ची चौहान
बरदेभाटा, कांकेर
बिखेर दो उस आंगन में
जहां झोपड़ी के छोटी
खिड़की के बाहर
झांकती है मुनिया
बस्ता लेकर जाते
नन्हें बच्चों को।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर दो उन खलिहानों में
जहां रमेली गाती है
स्वच्छ भारत के गीत।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर दो उन नौनिहालों
के चौराहे में
जहां वे भूल गए हैं
पथ
मील के पत्थर के
घिस जाने से।
धूप का छोटा-सा टुकड़ा
बिखेर ही दो उन
भुल भुलैया राहों में
जहां विसंगतियों का
अजगर निगल रहा है
संस्कृति के पायदानों को।
धूप का छोटा-सा
टुकड़ा ही काफी है
जग से स्याह
अमावस मिटाने को
राहों में उजाला फैलाने को।
मीरा आर्ची चौहान
बरदेभाटा, कांकेर
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