Tuesday, September 3, 2019

रूद्रप्रयाग उत्तराखंड से कवि कालिका प्रसाद सेमवाल की कृति दर्द ही दर्द

नाम - कालिका प्रसाद सेमवाल
शीर्षक - दर्द ही दर्द
राज्य -  उत्तराखंड रूद्रप्रयाग
सम्पर्क -8171208350
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  दर्द ही दर्द

सूर्योदय की पहली किरण के साथ
आँख खोलते ही नन्हीं कली ने देखा,
दुनिया कितनी सुंदर है
नन्हीं कली मंद -मंद मुस्कुराई

संतरगी दुनिया में खोई ही थी
कि तेजगति एक हाथ ने उसे छुआ,
कली घबरा गई
उसने कहा कि मुझे मत तोड़ो।

मैं अभी अभी तो खिली हूँ
इस सतरंगी दुनिया से मिली हूँ।
नन्हीं कली बहुत रोई
और कहने लगी कि अभी मेरी उम्र ही क्या है?

पर उस बेरहम को कोई दया नहीं आई
उसने कली को डाली से जुदा कर दिया,
उसके सपनों को साकार होने से
पहले ही तोड़ दिया।

कितना निर्दयी है ये इंसान
किसी को खिला देखकर
हो जाता है शैतान।
और मिटा देता नन्हीं जान का भी अस्तित्व।
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  कालिका प्रसाद सेमवाल
    मानस सदन अपर बाजार
     रूद्रप्रयाग उत्तराखंड

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