कवयित्री-मीरा आर्ची चौहान
शीर्षक-बापू के सपनों का भारत
राज्य-36गढ़
कविता-
बापू तुम बहुत याद
आते हो।
जब-जब फैलती है
हिंसा और आतंक का जहर।
असुरक्षित बेटियों का भविष्य
खतरे में रहता आंखों पहर।
गुलाम होती मानसिकता
दहेज की बलिवेदी पर
जलते दिखता
सारा शहर,
तब सच बापू तुम
बहुत याद आते हो।
ऐ राष्ट्र पिता!
तुमने तो हमें स्वराज्य
दिलाया था पर
सुराज अब तक
नहीं आया।
आधी रात को
तुने आजादी दिला दी
पर सबेरा अभी तक
नहीं आया।
जब-जब मनाते हैं
जन्मदिन तुम्हारा
शपथें लेते हैं
देशप्रेम की
आमसभाओं में
फोटो पर तुम्हारी
फूल मालाएं चढ़ाई
जाती है।
भ्रष्टाचार पर जब भी
नजरें जाती है ठहर।
तब सच बापू तुम
बहुत याद आते हो।
अब तो लोगों की मानसिकता
सिमट आई है चौराहे तक
जहां तुम्हें खड़ा कर दिया
गया है और नाम
दे दिया गया है गांधी चौक।
तुम्हारे चारों ओर
नारी के विकृत रुप को
प्रचारित करते पोस्टरों ने
तुम्हारा घेराव कर लिया है।
यह तो अच्छा हुआ कि
तुम परलोक में हो
वरना तुम यह सब देख
बहुत रोते।
जब-जब दिखता
पाश्चात्य संस्कृति का
फैलता जहर।
तब सच बापू तुम
बहुत याद आते हो।
लोभियों के साथ
चोरों की भी अब
कमी नहीं।
तुम तो सारे भारत के
श्रद्धा के के न्द्र थे
अब तुम्हारी प्रतिमा के
आंखों पर लगे
चश्में व हाथ की लाठी भी
लोग चुरा ले जाते हैं।
दिखाने को शराफत
लोग झूठी कसमें खाते हैं।
तब सच बापू तुम
बहुत याद आते हो।
बापू तुम पुनर्जन्म पर
विश्वास रखते थे,
अब यदि पुनर्जन्म लेना चाहो
तो सभी भारतीयों के
मन में जन्म लेना
ताकि बदल सके
जनमानस की मानसिकता
और मेरा भारत पुनः
सारे जहां से अच्छा
बन सके।
जब-जब तुम्हारे सिद्धांत
पथ प्रदर्शन करते हैं
तब सच बापू तुम
बहुत याद आते हो।
मीरा आर्ची चौहान
कांकेर,36गढ़
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