कवि का नाम _ संतोष श्रीवास्तव सम
शीर्षक _ शिक्षक होता
राज्य _ छत्तीसगढ
मोबाइल ९९९३८१९४२९
शीर्षक _ शिक्षक होता
काश के मै भी शिक्षक होता,
जीवन का सच्चा सुख पाता,
जीवन नही यूं ही जाता,
जीवन अपना सफल बनाता।
विद्या दान महा दान है,
मैने गुरू से अपने जाना है,
जो दान करे इसका सुना है,
होता उसका सदा कल्यान है।
यह जीवन न व्यर्थ ही खोता,
काश के मै भी शिक्षक होता।
शिक्षा से जीवन मुस्काये,
राह सुगम व सहज बनाये,
सद्भावों के दीप जलाये,
रौशन घर आंगन हो जाये।
ऐसा पुण्य प़ताप मिल पाता,
काश के मै भी शिक्षक होता।
आज प़भु चरणों मे तेरे,
इतना सा वरदान मै मांगू,
जब भी मानस तन मै पाऊ,
शिक्षक बन इस धरा पे आऊ।
हर जीवन फिर सहज खिलाता,
काश के मै भी शिक्षक होता।
संतोष श्रीवास्तव सम।
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