माँ बहुत बीमार है मेरी
घर में नहीं है दाना ।
कचड़े में ढूंढ रहा था
मिल गया मुझे खाना ।
जी भर कर मै खालूं पहले
घर खाना ले जाऊँगा ।
माँ तो कब से भूखी है
हाथों से उसे खिलाऊँगा ।
हे भगवान बापू को तुमने
अपने पास बुलाया ।
कौन कमायेगा बता
क्यों खाना नहीं भिजवाया ।
बापू होते माँ न रोती
और बीमार न होती ।
दो जून रोटी तो खाते
माँ लाचार न होती ।
जिसने फेंका खाना उसने
मेरे लिये फेंका होगा ।
रोता हूँ मैं यहीं बैठ कर
उसने कभी देखा होगा ।
कैसे भी हो खाना मिले
मैं बड़ा हो जाऊँ ।
मेहनत खूब करूँगा
माँ के लिये दवाई लाऊँ।।
भगवान जी बापू को
कुछ दिन के लिये लौटा दो ना ।
या फिर धर आकर मेरी
माँ को ठीक करादो ना
केवरा यदु "मीरा "
राजिम
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