Sunday, July 7, 2019

चित्र पर आधारित रचना by केवरा यदु "मीरा "

माँ बहुत बीमार है मेरी
घर में नहीं  है दाना ।
कचड़े में  ढूंढ रहा था
मिल गया मुझे  खाना ।

जी भर कर मै  खालूं पहले
घर खाना  ले जाऊँगा ।
माँ  तो कब से भूखी है
हाथों से उसे खिलाऊँगा ।

हे भगवान बापू को तुमने
अपने  पास  बुलाया ।
कौन  कमायेगा  बता
क्यों खाना नहीं भिजवाया ।

बापू  होते  माँ  न रोती
और बीमार न होती ।
दो जून रोटी तो  खाते
माँ  लाचार न होती ।

जिसने फेंका खाना उसने
मेरे लिये फेंका होगा ।
रोता हूँ  मैं यहीं बैठ कर
उसने कभी देखा  होगा ।

कैसे  भी हो खाना  मिले
मैं बड़ा  हो  जाऊँ ।
मेहनत खूब  करूँगा
माँ के लिये  दवाई  लाऊँ।।

भगवान जी बापू को
कुछ दिन के लिये लौटा दो ना ।
या  फिर धर आकर मेरी
माँ को ठीक करादो   ना

केवरा यदु "मीरा "
राजिम

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