Monday, June 10, 2019

तकरार by कवि.कमलेश कौशिक

*🌹🌹*

**दफ़ा जो भी हो, दफा कीजिए।*
*गुनाहगार है हम, तो सजा दीजिए।।*
*छोड़ो तकरारे, ऐ बेवजह गुरूर ।*
*दौर है मोहब्बत का मजा लीजिए।।*

*हम कैसे कह दें, तुझसे से हाल-ए-दिल।*
*उलझन बड़ी है बड़ी मुश्किल।।*
*हर राज बेपर्दा हो जरूरी तो नहीं।*
*कुछ कुछ आंखों की बातें भी पढ़ा कीजिए।।*

*और मिलना तो रोज ही होता है।*
*कभी हाथ मिलाओ तो थोड़ा दबा दीजिए।।*
*हम बेवजह आशिक तो नहीं हुए।*
*कोई और बात है तो बता दीजिए।।*

*अफसाने तो बनेंगे, अब हवा भी खिलाफ होगी।*
*कहीं प्रेम के नगमे गुंजेंगे, कहीं विरह की विलाप होगी।।*
*गुजरना पड़े किसी भी हद तक।*
*पर आखिर में मिल के सुलह कीजिए।।*

*कोई रंजिश तो नहीं दिल में तेरे।*
*कभी मुझसे भी प्यार जता दीजिए।।*
*और गुजर ना जाए ये हसीन बहारें।*
*नफरतों को दिल से अलविदा कीजिए।।*

*छोड़ो तकरारे ये बेवजह गुरुर।*
*दौर है मोहब्बत का मजा लीजिए।।*

    *✍रचनाकार✍*
  *कवि.कमलेश कौशिक*
    *😃कठलहा 😃*
Mo.8827292703

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