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झूठा आरोप लगाकर
मत करना बदनाम,
अभी कदमों में खड़ा हुआ हूं
कमाना बाकी है नाम ll
जल जल कर चलते हुए
आखिर जाओगे कहां,
मिल जाओगे कभी ना कभी
प्रेम की मिट्टी में यहां ll
सुंदर है हर सुबह
और रंगीन है शाम,
अभी कदमों में खड़ा हुआ हूं,
कमाना बाकी है नाम ll
चलता हूं जब राह में
लोग खींचते हैं टांग,
रखकर बुरे भाव को
नफरत का पीते हैं भांग ll
पर मेरी नजरों में
सभी हैं एक समान,
अभी कदमों में खड़ा हुआ हूं,
कमाना बाकी है नाम ll
झूठा आरोप हमेशा
लगाते हैं लोग,
बैठे-बैठे निंदा करते
उनको हो जाते हैं रोग ll
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रचना कार :-
बालकवि - भास्कर वर्मा "उमंग"
ग्राम- चंदना (छत्तीसगढ़) मो. न. 6268812376
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