Sunday, June 9, 2019

ननपन में by कवि.कमलेश कौशिक

*🌹🌹*

*नान नान रहन ता कतना मजा आय।*
*वो दिन भइया अब लहुट के नी आय।।*

*आठ बजे उठन हाथ गोड़ ल छटियाय।*
  *अउ चाय बर झगरा होन तहन,दाई नंगत ले ठठाय।।*
     *अऊ सरपट तिरन बरफ ला।*
      *वो कोहनी के आत ले चुचवाय।।**
*वो दिन भइया अब........*

*पानी गिरे बिकट ता,गोदगोदा में भिंगन।*
   *संडेवा काडी़ के बीडी़ ला कलेचुप झिकन।।*
*तकिया के चिरात ले,झगरा होन।*
   *तहन ददा ह भारी गुसयाय।।*
*वो दिन भइया.......*

*रात रात भर बिडियो देखतेन।*
  *फोकटे फोकट लड़ाई खेलतेन।।*
*सरि मझनिया तरिया में डुबकतेन।*
*पथरा के खोल में.ढोडी़हा कोचकतेन।।*
*तहन लउठी धर के कोतवाल कुदाय।*
*वो दिन संगी अब लहुट के नी आय।।*

   *✍रचनाकार✍*
*कवि.कमलेश कौशिक*
   *😃कठलहा 😃*

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