*कुहरत हे तन हा.जरत हे पसीना*।
*मुशकिल गुजरत हे.जेठ के महीना*।।
*किलिल कालल लइका करे*।
*बिजली बंद बिकट कुहरे*।।
*सिलिंग फैन ल लु धरलिस*।
*अलकरहा गरमी वोहा उछरे।।*
*करिया परगे बिकट हसीना*
*कुहरत हे तन हा.जरत हे पसीना।।*
*खाना पिना होगे हराम।*
*थोरको तो नइ मिलत हे अराम।।*
*तीन दिन ले लइका ह परे हे।*
*डाकटर घर के लाइन धरे हे।।*
*तड़फत जीव ला तेहा पिया दे।*
*पानी मा घोर के पदीना।*
*कुहरत तन हा जरत हे पसीना।।*
*मुशकिल गुजरत हे जेठ के महीना*..
*✍रचनाकार✍*
*कवि.कमलेश कौशिक*
*😃कठलहा 😃*
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