लंबे अरसे के इंतज़ार के बाद आखिर एक दिन राज ने अपने घरवालों से सही समय देखकर कहा:-
"मुझे तानी से शादी करनी है। रिश्ते की बात करने के लिए आप तानी के पिता से मिल आइये।"
ये सब सुनकर राज के पिता ने गुस्से से राज की तरफ देखा और कहा:-
"हम में से किसी को भी वह लड़की पसंद नहीं है, तुम्हे उस लड़की को भूलना होगा।"
इस बात को सुनते हुए फिर राज ने भी यह कह दिया:-
"भूलने का सवाल ही पैदा नहीं होता,क्योकि शादी करूँगा तो सिर्फ तानी से ही करूंगा। आपका आशीर्वाद हो तो अच्छी बात है,अगर नहीं तो कोर्टमैरिज कर लूंगा औऱ इसके लिए इस घर से ही मुझे रिश्ता तोड़कर ही क्यों ना मुझे आगे कदम बढ़ाना पड़े।"
यह बात सोचते हुए घर वालों ने इस बात का ख्याल किया:-
"बेटे के दूर होने के भय से निपटारा पाने के लिए पहले शादी के लिए हां कर दें । लेकिन हर कदम पर तानी के घरवालों के सामने अजीबो गरीब शर्त रखकर उसे बात-बात पर शर्मिंदा कर देंगे। जिससे तानी खुद राज से दूर हो जाएगी।"
तानी एक आत्मसम्मानी लडक़ी थी। जो कभी कोई गलत बात बर्दास्त नही करती थी। हमेशा सत्य के मार्ग पर डटी रहती थी। लेकिन उस समय राज से किये वादे के लिए चुपचाप वह सारे दर्द सह रही थी क्योंकि राज ने ही कहा था:-
"यह सब हम बाद में देख लेंगे, अभी शादी तक तुम बस चुप रहना।"
तानी के पिता को बात-बात पर धमकाने और अपने शर्तों से झुकाने पर मजबूर कराने के लिए राज के पिता तैयार हो गए थे क्योकि उन्हें पता था:-
"तानी अपने पिता की लाडली है तानी की खुशी के लिए वो हर अपमान सर झुकाकर सह लेंगे।"
राज की कोई बहन नही थी। इसलिए उनके परिवार वालो को एक बेटी के पिता होने के इस फर्ज और दर्द का आभास नहीं था। समाज की नजर में रिश्ता टूटने की बदनामी के ड़र से एक बेटी का पिता भी चुप था। इस पर लड़के के पिता का इतना सख्त रहना, मानो लग रहा था जैसे उनके पास दर्द को समझने के लिए भावनाएं ही नही हो।
तानी उनके सामने झुकी नहीं थी बल्कि सच तो ये था कि तानी भी चुप इसलिए थी क्योंकि वह राज से बेइंतहा मोहब्बत करती थी। एक पिता का बेटी के लिए अथाह प्रेम वाकई देखने योग्य था। राज उनकी पुत्री तानी को भगाकर ले जा सकता था।
लेकिन एक लड़की के पिता का सम्मान का मान रखते हुए राज ने रिश्ता भेजकर तानी के पिता की मर्जी से उनकी बेटी से ब्याह करने की इच्छा उनके सामने रखी।
राज ने तानी के पिता की ही तरह तानी का खयाल रखने और उनकी बेटी के आत्मसम्मान की रक्षा के लिए हमेशा आगे तानी के लिए ढाल बनकर खड़े रहने का वादा किया। इसी से ही तानी के पिता ने अपने बेटी का हाथ राज के हाथ मे देने का निर्णय कर ही लिया।
✍️अनिता सुभाष देशमुख
स्वरचित
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